菜单

घर

2019/07/08

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा

क्या तुम यीशु को देखना चाहते हो? क्या तुम यीशु के साथ रहना चाहते हो? क्या तुम यीशु के द्धारा कहे गए वचनों को सुनना चाहते हो? यदि ऐसा है, तो तुम यीशु के लौटने का कैसे स्वागत करेंगे? क्या तुम पूरी तरह से तैयार हो? किस ढंग से तुम यीशु के लौटने का स्वागत करेंगे? मुझे लगता है कि प्रत्येक भाई और बहन जो यीशु का अनुसरण करतें हो यीशु का अच्छी तरह से स्वागत करना चाहेंगे। परन्तु क्या तुम लोगों ने विचार किया है कि जब यीशु वापस आएगा तो क्या तुम सचमुच में उसे पहचान लेंगे? क्या तुम लोग सचमुच में वह सब कुछ समझ जाएँगे जो वह कहेगा? क्या तुम लोग वे सब कार्य जो यीशु करेगा, उन्हें, बिना किसी शर्त के, सचमुच में स्वीकार कर लेंगे?

2019/06/23

परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है

परमेश्वर के वचनपरमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है

पिछले दो युगों के कार्यों में से एक चरण का कार्य इस्राएल में सम्पन्न हुआ; दूसरा यहूदिया में हुआ। सामान्य तौर पर कहा जाए तो, इस कार्य के किसी भी चरण ने इस्राएल को नहीं छोड़ा; कार्य के ये वे चरण थे जो आरंभ में चुने गए लोगों के बीच किए गए थे। इस प्रकार, इस्राएलियों के दृष्टिकोण से, यहोवा परमेश्वर केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है। यहूदिया में यीशु के कार्य के कारण और सूली पर चढ़ाए जाने के उसके कार्य की पूर्णता के कारण, यहूदियों के दृष्टिकोण से, यीशु यहूदियों का मुक्तिदाता है। वह केवल यहूदियों का

2019/06/22

देहधारी परमेश्वर की सेवकाई और मनुष्य के कर्तव्य के बीच अंतर

तुम लोगों को अवश्य परमेश्वर के कार्य के दर्शन को जान लेना चाहिए और उसके कार्य के सामान्य निर्देशों को समझ लेना चाहिए। यह एक सकारात्मक तरीके से प्रवेश है। एक बार जब तुम दर्शन के सत्यों में परिशुद्धता से निपुण हो जाते हो, तो तुम्हारा प्रवेश सुरक्षित बन जाता है; इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उसका कार्य कैसे बदलता है, तुम अपने हृदय में अडिग बने रहोगे, दर्शन के बारे में स्पष्ट रहोगे, और तुम्हारे पास तुम्हारे प्रवेश और तुम्हारी तलाश के लिए एक लक्ष्य होगा। इस तरह से, तुम्हारे भीतर का समस्त अनुभव और ज्ञान और गहराई से बढ़ेगा और अधिक परिष्कृत हो जाएगा। एक बार जब तुम बड़ी तस्वीर को उसकी

2019/06/21

जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं


परमेश्वर के वचन-जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं

देहधारी परमेश्वर के कार्य में दो भाग शामिल हैं। जब सबसे पहली बार उसने देह धारण किया, तो लोगों ने उस पर विश्वास नहीं किया या उसे नहीं पहचाना, और यीशु को सलीब पर चढ़ा दिया। दूसरी बार भी लोगों ने उस पर विश्वास नहीं किया, उसे बहुत कम पहचाना, और एक बार फिर से मसीह को सलीब पर चढ़ा दिया। क्या मनुष्य परमेश्वर का बैरी नहीं हैं? यदि मनुष्य उसे नहीं जानता है, तो वह परमेश्वर का अंतरंग कैसे हो सकता है? और वह कैसे परमेश्वर की गवाही देने के योग्य हो सकता है? परमेश्वर को प्यार करना, परमेश्वर की सेवा करना, महिमा बढ़ाना—क्या ये कपटपूर्ण झूठ नहीं हैं? यदि तुम अपने जीवन को इन

2019/06/19

परमेश्वर के वचनों का एक भजन सबसे बड़ी आशीष जो ईश्वर मानव को प्रदान करता है



  • सबसे बड़ी आशीष जो ईश्वर मानव को प्रदान करता है

  • I
  • परमेश्वर के शब्दों के समापन के साथ, उसका साम्राज्य है बन रहा।
  • फिर से मानव के होने से सामान्य, प्रभु का साम्राज्य बना।
  • साम्राज्य में रहते परमेश्वर के जन, फिर पाओगे तुम मनुष्योचित जीवन।
  • आज, तुम जीते हो प्रभु के समक्ष; उसके साम्राज्य में जिओगे तुम कल।
  • आनंद – सौहार्द से भरी धरती सारी।
  • धरती पर प्रभु का साम्राज्य बना। धरती पर प्रभु का साम्राज्य बना।

2019/06/18

परमेश्वर के वचनों का एक भजन इंसान के लिए परमेश्वर के प्रबंध के मायने



  • इंसान के लिए परमेश्वर के प्रबंध के मायने

  • I
  • प्रबंधन ईश्वर का ऐसे लोगों को प्राप्त करने के लिए है
  • जो उसके अधीन रहें और आराधना करें।
  • यह मानवजाति, शैतान द्वारा भ्रष्ट की हुई,
  • अब और उसे पिता जैसे नहीं देखती।
  • वे जानते हैं उसका बुरा चेहरा, त्यागते हैं
  • और स्वीकारते हैं ईश्वर का न्याय और ताड़ना।

2019/06/17

वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है?

वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है?

परमेश्वर का कार्य निरंतर आगे बढ़ता रहता है, और यद्यपि उसके कार्य का प्रयोजन नहीं बदलता है, जिस मायनों वह कार्य करता है वे निरंतर बदलते रहते हैं, और फलस्वरूप वे लोग भी बदलते रहते हैं जो उसका अनुसरण करते हैं। जितना अधिक परमेश्वर का कार्य होगा, उतना ही अधिक मनुष्य परमेश्वर को जानेगा, और मनुष्य का स्वभाव भी परमेश्वर के कार्य के साथ बदलेगा। हालाँकि, ऐसा इसलिए है कि परमेश्वर का कार्य हमेशा बदलता रहता है कि जो लोग पवित्र आत्मा के कार्य के बारे में नहीं जानते हैं और सत्य को न जानने वाले

2019/06/16

केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर-केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है

वास्तव में, जो कार्य अब किया जा रहा है वह लोगों से शैतान का त्याग करवाने, उनके पुराने पूर्वजों का त्याग करवाने के लिए किया जा रहा है। वचन के द्वारा सभी न्यायों का उद्देश्य मानवता के भ्रष्ट स्वभाव को उजागर करना है और लोगों को जीवन का सार समझने में समर्थ बनाना है। ये बार-बार के न्याय मनुष्य के हदयों को छेद देते हैं। प्रत्येक न्याय सीधे उनके भाग्य पर प्रभाव डालता है और उनके हृदयों को घायल करने के आशय से है ताकि वे उन सभी बातों को जाने दें और फलस्वरूप जीवन के बारे में जान जाएँ, इस गंदी दुनिया को

2019/06/15

उपाधियों और पहचान के सम्बन्ध में

उपाधियों और पहचान के सम्बन्ध में

यदि तुम परमेश्वर द्वारा उपयोग के लिए उपयुक्त होने की कामना करते हो; तो तुम्हें परमेश्वर के कार्य के बारे में अवश्य जानना चाहिए; तुम्हें उस कार्य को अवश्य जानना चाहिए जो उसने पहले किया था (नए और पुराने नियमों में); और, इसके अतिरिक्त, तुम्हें उसके वर्तमान कार्य को अवश्य जानना चाहिए। कहने का तात्पर्य है, तुम्हें 6,000 वर्षों के परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को अवश्य जानना चाहिए। यदि तुम्हें सुसमाचार फैलाने के लिए कहा जाता है, तो तुम परमेश्वर के कार्य को जाने बिना ऐसा करने में समर्थ नहीं होगे। कोई तुमसे

2019/06/14

तुम्हें पता होना चाहिए कि समस्त मानवजाति आज के दिन तक कैसे विकसित हुई

6000 वर्षों के दौरान कार्य की समग्रता समय के साथ धीरे-धीरे बदल गई है। इस कार्य में बदलाव समस्त संसार की परिस्थितियों के अनुसार हुए हैं। परमेश्वर का प्रबंधन का कार्य केवल मानवजाति के पूर्णरूपेण विकास की प्रवृत्ति के अनुसार धीरे-धीरे रूपान्तरित हुआ है; सृष्टि के आरंभ में इसकी पहले से योजना नहीं बनाई गई थी। संसार का सृजन करने से पहले, या इसके सृजन के ठीक बाद, यहोवा ने अभी तक कार्य के प्रथम चरण, व्यवस्था की; कार्य के दूसरे चरण—अनुग्रह की; और कार्य के तीसरे चरण—जीतने की योजना नहीं

2019/06/13

छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी

छुटकारे के युग में कार्य के पीछे की सच्ची कहानी

मेरी सम्पूर्ण प्रबन्धन योजना, ऐसी योजना जो छः हज़ार सालों तक फैली हुई है, तीन चरणों या तीन युगों को शामिल करती हैः आरंभ में व्यवस्था का युग; अनुग्रह का युग (जो छुटकारे का युग भी है); और अंत के दिनों में राज्य का युग। प्रत्येक युग की प्रकृति के अनुसार मेरा कार्य इन तीनों युगों में तत्वतः अलग-अलग है, परन्तु प्रत्येक चरण में यह मनुष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप है—या बल्कि, अधिक स्पष्ट कहें तो, यह उन छलकपटों के अनुसार किया जाता है जो शैतान उस युद्ध में काम में लाता है जो मैं उसके विरुद्ध शुरू करता

2019/06/12

व्यवस्था के युग का कार्य

व्यवस्था के युग का कार्य

वह कार्य जो यहोवा ने इस्राएलियों पर किया, उसने मानवजाति के बीच पृथ्वी पर परमेश्वर के मूल स्थान को स्थापित किया जो कि वह पवित्र स्थान भी था जहाँ वह उपस्थित रहता था। उसने अपने कार्य को इस्राएल के लोगों तक ही सीमित रखा। आरम्भ में, उसने इस्राएल के बाहर कार्य नहीं किया; उसके बजाए, उसने ऐसे लोगों को चुना जिन्हें उसने अपने कार्यक्षेत्र को सीमित रखने के लिए उचित पाया। इस्राएल वह जगह है जहाँ परमेश्वर ने आदम और हव्वा की रचना की, और उस जगह की धूल से यहोवा ने मनुष्य को बनाया; यह स्थान पृथ्वी पर उसके कार्य का आधार बन गया। इस्राएली, जो नूह के वंशज थे, और आदम के भी वंशज थे, पृथ्वी पर यहोवा के कार्य की मानवीय बुनियाद थे।

2019/06/11

राज्य के नज़ारे लगते हैं नये सदा



  • कलीसिया का भजन
  • राज्य के नज़ारे लगते हैं नये सदा

  •  I
  • धुंधले आसमान से चमकता है उगता सूरज पूरब में,
  • लौट आया है साकार रूप लेकर
  • इस जगत में मुक्तिदाता।
  • राज्य-जीवन को अंगीकार कर रही है दुनिया,
  • जीवंत हो उठी है हर चीज़।
  • आह! अब हो गया है सवेरा।
  • आह! हमारी नज़रों के सामने है रोशनी।
  • साकार हुई हैं उम्मीदें दो हज़ार सालों की।

2019/06/10

इरादा पक्का है परमेश्वर के अनुसरण का



  • आराधना गीत
  • इरादा पक्का है परमेश्वर के अनुसरण का

  •  I
  • परमेश्वर में आज तक आस्था रखकर,
  • आख़िर देख ली है रोशनी मैंने।
  • यातना और तकलीफ़ों की पथरीली राह पर चली हूँ मैं।
  • तज दिया संसार ने मुझको, दोस्त भी दूर-दूर रहते हैं।
  • न जाने कितनी रातें प्रार्थना में, जागकर गुज़ारी हैं मैंने।
  • ग़म और ख़ुशी के न जाने, कितने आँसू बहाए हैं मैंने।
  • दौड़ती रहती हूँ दिनभर, चैन कहीं न पाया मैंने।

2019/06/09

सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है

सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है

सभी लोगों को पृथ्वी पर मेरे कार्य के उद्देश्य को समझने की आवश्यकता है, अर्थात्, मेरे कार्य का अंतिम उद्देश्य और इससे पहले कि इसे पूरा किया जा सके कौन सा स्तर मुझे इस कार्य में अवश्य प्राप्त कर लेना चाहिए। यदि, आज के दिन तक मेरे साथ चलते रहे लोग यह नहीं समझते हैं कि मेरा समस्त कार्य किस बारे में है, तो क्या वे मेरे साथ व्यर्थ में नहीं चल रहे हैं? जो लोग मेरा अनुसरण करते हैं उन्हें मेरी इच्छा जाननी चाहिए। मैं हज़ारों सालों से पृथ्वी पर कार्य करता आ रहा हूँ, और आज के दिन तक अभी भी मैं अपना कार्य इसी तरह

2019/06/08

उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है

परमेश्वर के वचन-उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है

कई हज़ार सालों से, मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता के आगमन को देखने में सक्षम होने की लालसा की है। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता यीशु को देखने की इच्छा की है जब वह एक सफेद बादल पर सवार होकर स्वयं उन लोगों के बीच उतरता है जिन्होंने हज़ारों सालों से उसकी अभिलाषा की है और उसके लिए लालायित रहे हैं। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता की वापसी और लोगों के साथ उसके फिर से जुड़ने की लालसा की है, अर्थात्, उद्धारकर्त्ता यीशु के उन लोगों

2019/06/07

देह की चिन्ता करने वालों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है

देह की चिन्ता करने वालों में से कोई भी कोप के दिन से नहीं बच सकता है

आज, मैं तुम लोगों की उत्तरजीविता के वास्ते इस प्रकार से धिक्कारता हूँ, ताकि मेरा कार्य सुचारू रूप से प्रगति करे, और ताकि सम्पूर्ण जगत में मेरा आरंभिक कार्य, मेरे वचनों, अधिकार, प्रताप और मेरे न्याय को सभी देशों और राष्ट्रों के लोगों के लिए प्रकट करते हुए, और भी अधिक उचित ढंग से और उत्तम तरह से किया जा सके। जो कार्य मैं तुम लोगों के बीच करता हूँ वह सम्पूर्ण जगत में मेरे कार्य का आरम्भ है। यद्यपि अभी अंत के दिन चल रहे हैं, फिर भी ज्ञात रहे कि "अंत के दिन" केवल एक नए युग का नाम हैः ठीक व्यवस्था के युग

2019/06/06

तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो?

तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो?

मनुष्य केवल विश्वास के अनिश्चित शब्द पर बना रहता है, फिर भी मनुष्य यह नहीं जानता है कि वह क्या है जो विश्वास का निर्माण करता है, और यह तो बिलकुल ही नहीं जानता है कि उसके पास विश्वास क्यों है। मनुष्य बहुत ही कम जानता है और स्वयं मनुष्य में बहुत सारी कमियाँ हैं; वह बस लापरवाही और अज्ञानता से मुझ पर विश्वास रखता है। यद्यपि वह नहीं जानता है कि विश्वास क्या है न ही वह यह जानता है कि वह क्यों मुझ पर विश्वास रखे हुए है, वह सनक के साथ निरन्तर ऐसा करता रहता है। जो मैं मनुष्य से चाहता

2019/06/05

एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है

एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है

मनुष्य का प्रबंधन करना मेरा कार्य है, और मेरे द्वारा उसे जीत लिया जाना और भी अधिक कुछ चीज़ है जो तब नियत की गई थी जब मैंने संसार की रचना की थी। हो सकता है कि लोग नहीं जानते हों कि अंत के दिनों में मैं उन्हें पूरी तरह से जीत लूँगा और हो सकता है कि वे इस बारे में भी अनजान हों कि मानवजाति में से विद्रोही लोगों को जीत लेना ही शैतान को मेरे द्वारा हराने का प्रमाण है। परन्तु जब मेरा शत्रु मेरे साथ संघर्ष में शामिल हुआ, तो मैंने उसे पहले से ही बता दिया था कि मैं उन सभी को जिन्हें शैतान ने बंदी बना लिया था

2019/06/04

पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान

पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान

जब पतरस को परमेश्वर के द्वारा ताड़ना दी जा रही थी, तो उसने प्रार्थना की, "हे परमेश्वर! मेरी देह अनाज्ञाकारी है, तू मुझे ताड़ना देता है और मेरा न्याय करता है। मैं तेरी ताड़ना और न्याय में आनन्दित होता हूँ, भले ही तू मुझे न चाहे, फिर भी मैं तेरे न्याय में तेरे पवित्र और धर्मी स्वभाव को देखता हूँ। जब तू मेरा न्याय करता है, ताकि अन्य लोग तेरे न्याय में तेरे धर्मी स्वभाव को देख सकें, तो मैं संतुष्टि का एहसास करता हूँ। मैं यही चाहता हूँ कि तेरा धर्मी स्वभाव प्रकट किया जाये ताकि सभी प्राणी तेरे धर्मी स्वभाव को देख सकें, और मैं

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा क्या तुम यीशु को द...