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2019/06/16

केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर-केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है

वास्तव में, जो कार्य अब किया जा रहा है वह लोगों से शैतान का त्याग करवाने, उनके पुराने पूर्वजों का त्याग करवाने के लिए किया जा रहा है। वचन के द्वारा सभी न्यायों का उद्देश्य मानवता के भ्रष्ट स्वभाव को उजागर करना है और लोगों को जीवन का सार समझने में समर्थ बनाना है। ये बार-बार के न्याय मनुष्य के हदयों को छेद देते हैं। प्रत्येक न्याय सीधे उनके भाग्य पर प्रभाव डालता है और उनके हृदयों को घायल करने के आशय से है ताकि वे उन सभी बातों को जाने दें और फलस्वरूप जीवन के बारे में जान जाएँ, इस गंदी दुनिया को

2019/06/05

एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है

एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है

मनुष्य का प्रबंधन करना मेरा कार्य है, और मेरे द्वारा उसे जीत लिया जाना और भी अधिक कुछ चीज़ है जो तब नियत की गई थी जब मैंने संसार की रचना की थी। हो सकता है कि लोग नहीं जानते हों कि अंत के दिनों में मैं उन्हें पूरी तरह से जीत लूँगा और हो सकता है कि वे इस बारे में भी अनजान हों कि मानवजाति में से विद्रोही लोगों को जीत लेना ही शैतान को मेरे द्वारा हराने का प्रमाण है। परन्तु जब मेरा शत्रु मेरे साथ संघर्ष में शामिल हुआ, तो मैंने उसे पहले से ही बता दिया था कि मैं उन सभी को जिन्हें शैतान ने बंदी बना लिया था

2019/06/04

पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान

पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान

जब पतरस को परमेश्वर के द्वारा ताड़ना दी जा रही थी, तो उसने प्रार्थना की, "हे परमेश्वर! मेरी देह अनाज्ञाकारी है, तू मुझे ताड़ना देता है और मेरा न्याय करता है। मैं तेरी ताड़ना और न्याय में आनन्दित होता हूँ, भले ही तू मुझे न चाहे, फिर भी मैं तेरे न्याय में तेरे पवित्र और धर्मी स्वभाव को देखता हूँ। जब तू मेरा न्याय करता है, ताकि अन्य लोग तेरे न्याय में तेरे धर्मी स्वभाव को देख सकें, तो मैं संतुष्टि का एहसास करता हूँ। मैं यही चाहता हूँ कि तेरा धर्मी स्वभाव प्रकट किया जाये ताकि सभी प्राणी तेरे धर्मी स्वभाव को देख सकें, और मैं

2019/06/03

कलीसिया का भजन जीने के लिये इंसान के पास सत्य होना चाहिये



  • कलीसिया का भजन
  • जीने के लिये इंसान के पास सत्य होना चाहिये

  • I
  • भरोसा है जिसे परमेश्वर में,
  • नीरस ज़िंदगी से बचने के लिये,
  • उसके पास परमेश्वर के वचन होने चाहिये।
  • चमकती है रोशनी परमेश्वर के वचनों से,
  • कौन हूँ मैं जानता नहीं, बग़ैर परमेश्वर के वचनों के।
  • परमेश्वर के करीब अपने दिल को रखने के लिये,
  • हमें उसके वचन पढ़ने चाहिये,
  • सत्य के संग अक्सर संवाद करना चाहिये।

2019/06/02

कलीसिया का भजन हार्दिक लगाव का गीत



  • कलीसिया का भजन
  • हार्दिक लगाव का गीत 

  • I
  • एक है देहधारी परमेश्वर
  • जो भी वो कहता, जो भी वो करता, सब सत्य है।
  • उसकी धार्मिकता और बुद्धि से प्रेम है मुझे।
  • उसे देखना, उसकी बात मानना, एक आशीष है।
  • उसके दिल और प्यार ने जीत लिया है मुझे।
  • और नहीं खोजती, अब उसके पीछे दौड़ती हूँ मैं।
  • उसकी गवाही देने खातिर, सहती हूँ मुश्किलें मैं,
  • पर ये अच्छा लगता है मुझे।
  • उसके प्रति वफादार हूँ मैं, अपने प्रियतम से प्रेम है मुझे।

2019/05/28

एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है

परमेश्वर के वचन-एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है

भ्रष्टाचार के हजारों सालों बाद, मनुष्य बेसुध और मूर्ख बन गया है, एक दुष्ट आत्मा जो परमेश्वर का विरोध करती है, इस हद तक कि परमेश्वर के प्रति मनुष्य की विद्रोहशीलता इतिहास की पुस्तकों में दर्ज हो गई है, और यहाँ तक कि मनुष्य खुद भी अपने विद्रोही स्वभाव का पूरा लेखा देने के अयोग्य है—क्योंकि मनुष्य शैतान के द्वारा पूरी तरह से भ्रष्ट किया जा चुका है, और शैतान के द्वारा रास्ते से भटका दिया गया है और वह नहीं जानता कि कहाँ मुड़ना है। आज भी, मनुष्य परमेश्वर को धोखा देता है: जब मनुष्य परमेश्वर को देखता है, तो

2019/05/25

परमेश्वर के वचनों का एक भजन परमेश्वर उन्हें आशीष देता है जो ईमानदार हैं



  • परमेश्वर उन्हें आशीष देता है जो ईमानदार हैं

  •  I
  • जब तुम ईश्वर को देते हो दिल और उसे धोखा नहीं देते हो,
  • जब तुम खुद से ऊँचे या नीचे लोगों को कभी नहीं छलते हो,
  • जब ईश्वर के प्रति साफ़दिल हो सब चीज़ों में,
  • जब तुम ईश्वर की चापलूसी वाले काम न करो,
  • है ये बनना ईमानदार।
  • ईमानदारी है अपने कार्यों और वचनों से अशुद्धि को दूर रखना,

2019/05/24

परमेश्वर के वचनों का एक भजन बदली नहीं हैं परमेश्वर की उम्मीदें इंसान के लिये



  • बदली नहीं हैं परमेश्वर की उम्मीदें इंसान के लिये

  •  I
  • जब इसहाक को पेश किया बलिदान के लिये अब्राहम ने,
  • तो देखी परमेश्वर ने आज्ञाकारिता और ईमानदारी उसकी,
  • कामयाब रहा वो परमेश्वर के इम्तहान में।
  • परमेश्वर का विश्वासपात्र बनने, उसे जानने की योग्यता से
  • अभी भी दूर था मगर वो।
  • देख नहीं सका परमेश्वर का स्वभाव वो।
  • परमेश्वर से एक मन होने से, उसकी इच्छा पूरी करने से, बहुत दूर था वो।

2019/05/23

पतरस ने यीशु को कैसे जाना

पतरस ने यीशु को कैसे जाना

उस समय के दौरान जो पतरस ने यीशु के साथ बिताया, उसने यीशु में अनेक प्यारे अभिलक्षणों, अनेक अनुकरणीय पहलुओं, और अनेक ऐसी चीजों को देखा जिन्होंने उसे आपूर्ति की। यद्यपि पतरस ने कई तरीकों से यीशु में परमेश्वर के अस्तित्व को देखा, और कई प्यारे गुण देखे, किन्तु पहले वह यीशु को नहीं जानता था। पतरस जब 20 वर्ष का था तब उसने यीशु का अनुसरण करना आरम्भ किया, और छः वर्ष तक वह ऐसा करता रहा। उस समय के दौरान, उसे यीशु के बारे में कभी भी पता नहीं चला, किन्तु वह केवल उसके प्रति आदर और प्रशंसा के भाव के कारण उसका अनुसरण करने को तैयार रहता था। जब यीशु ने

2019/05/22

केवल वे लोग ही परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं जो परमेश्वर को जानते हैं

केवल वे लोग ही परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं जो परमेश्वर को जानते हैं

यह स्वर्ग का नियम और पृथ्वी का सिद्धांत है कि परमेश्वर पर विश्वास किया जाए और उसको जाना जाए, और आज - इस युग के दौरान जब देहधारी परमेश्वर स्वयं अपना कार्य करता है - यह परमेश्वर को जानने के लिए विशेष अच्छा समय है। परमेश्वर को संतुष्ट करना उसकी इच्छा को समझने पर आधारित है, और परमेश्वर की इच्छा को जानने के लिए, परमेश्वर को अच्छी तरह से जानना आवश्यक है। परमेश्वर की यह जानकारी एक दर्शन है जो एक विश्वासी के पास होना चाहिए; यह परमेश्वर में मनुष्य के विश्वास का आधार है।

2019/05/17

परमेश्वर के वचनों का एक भजन एकमात्र परमेश्वर का प्रभुत्व है इंसान की नियति पर



  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • एकमात्र परमेश्वर का प्रभुत्व है इंसान की नियति पर

  •  
  • I
  • तुम अपने जीवन में चाहे कितनी ही दूर तक चले हो,
  • चाहे तुम कितने ही बुज़ुर्ग हो,
  • तुम्हारी यात्रा चाहे कितनी ही शेष हो,
  • तुम्हें परमेश्वर के अधिकार को पहचानना होगा,
  • वो तुम्हारा अद्वितीय स्वामी है, इसे पूरे ईमान से स्वीकारना होगा।
  • कितनी ही बड़ी हो काबिलियत किसी की,
  • दूसरों की नियति को कोई प्रभावित कर नहीं सकता,
  • आयोजित करने, बदलने या काबू करने की तो बात ही क्या।
  • इंसान की हर चीज़ पर प्रभुत्व है सिर्फ़ अद्वितीय परमेश्वर का,
  • क्योंकि इंसान की नियति पर सिर्फ़ उसी को अधिकार है शासन करने का।
  • इस तरह सिर्फ़ सृष्टिकर्ता ही स्वामी है इंसान का।

2019/05/15

जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे


जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे

पवित्र आत्मा का कार्य दिन ब दिन बदलता जाता है, हर एक कदम के साथ ऊँचा उठता जाता है; आने वाले कल का प्रकाशन आज से भी कहीं ज़्यादा ऊँचा होता है, कदम दर कदम और ऊपर चढ़ता जाता है। जिस कार्य के द्वारा परमेश्वर मनुष्य को सिद्ध करता है वह ऐसा ही है। यदि मनुष्य उस गति से चल न पाए, तो उसे किसी भी समय पीछे छोड़ा जा सकता है। यदि मनुष्य के पास आज्ञाकारी हृदय न हो, तो वह अंत तक अनुसरण नहीं कर सकता है। पूर्व का युग गुज़र गया है; यह एक नया युग है। और नए युग में, नया कार्य करना होगा।

2019/05/14

जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं

जो आज परमेश्वर के कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर की सेवा कर सकते हैं

परमेश्वर की गवाही देने के लिए और बड़े लाल अजगर को शर्मिन्दा करने के लिए तुम्हारे पास एक सिद्धांत, एक शर्त होनी चाहिए: अपने दिल में तुम्हें परमेश्वर से प्रेम करना चाहिए और परमेश्वर के वचनों में प्रवेश करना चाहिए। यदि तू परमेश्वर के वचनों में प्रवेश नहीं करेगा तो तेरे पास शैतान को शर्मिन्दा करने का कोई तरीका नहीं होगा। अपने जीवन के विकास द्वारा, तुम बड़े लाल अजगर को त्यागते हो और उसका अत्यधिक तिरस्कार करते हो, और केवल तभी बड़ा लाल अजगर पूरी तरह से शर्मिन्दा होगा। जितना अधिक तुम परमेश्वर

2019/05/13

परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर

परमेश्वर पर विश्वास करना वास्तविकता पर केंद्रित होना चाहिए, न कि धार्मिक रीति-रिवाजों पर

तुम कितनी धार्मिक परम्पराओं का पालन करते हो? कितनी बार तुमने परमेश्वर के वचन का विरोध किया है और अपने तरीके से चले हो? कितनी बार तुम परमेश्वर के वचनों को इसलिए अभ्यास में लाए हो क्योंकि तुम उसके उत्तरदायित्व के बारे में सच में विचारशील हो और उसकी इच्छा पूरी करना चाहते हो? परमेश्वर के वचन को समझो और उसे अभ्यास में लाओ। क्रियाओं और कर्मों में उच्च सिद्धांत वाले बनो; यह नियम में बंधना या बेमन से बस दिखावे के लिए ऐसा करना नहीं है। बल्कि, यह एक सत्य का अभ्यास और परमेश्वर के वचन में जीवन व्यतीत करना है। केवल इस प्रकार का अभ्यास ही परमेश्वर को संतुष्ट करता है। कोई भी प्रथा जो परमेश्वर को प्रसन्न करती हो कोई नियम नहीं है बल्कि सत्य का अभ्यास है।

2019/05/12

सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए

सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए

संपूर्ण जगत में अपने कार्य की शुरूआत से ही, परमेश्वर ने अनेक लोगों को अपनी सेवा के लिए पूर्वनियत किया है, जिसमें हर व्यवसाय के लोग शामिल हैं। उसका प्रयोजन अपनी स्वयं की इच्छा को पूरा करना है और यह सुनिश्चित करना है कि पृथ्वी पर उसके कार्य को निर्बाध रूप से सफलता तक पहुँचाया जाए। परमेश्वर का लोगों को अपनी सेवा हेतु चुनने का यही प्रयोजन है। परमेश्वर की सेवा करने वाले हर व्यक्ति को परमेश्वर की इस इच्छा को

2019/05/10

परमेश्वर के वचनों का एक भजन परमेश्वर द्वारा इन लोगों के चुने जाने का महान अर्थ



  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • परमेश्वर द्वारा इन लोगों के चुने जाने का महान अर्थ 

  • I
  • इस धारा के व्यक्ति के रूप में,
  • तुम सबको वास्तव में ईश्वर की
  • महान योजना का, उसकी पूरी प्रबंधन योजना का,
  • उद्देश्य जानना चाहिए,
  • तथ्य जानो जो वो पहले ही पूरा कर चुका,
  • उसने क्यों लोगों के एक समूह को चुना,
  • इसके लक्ष्य और अर्थ क्या हैं,
  • और ईश्वर तुममें क्या पाना चाहता है।

2019/05/09

परमेश्वर के वचनों का एक भजन मानवजाति के प्रति परमेश्वर की करुणा निरंतर बहती है



  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • मानवजाति के प्रति परमेश्वर की करुणा निरंतर बहती है
  •  I
  • "सृष्टिकर्ता की करुणा"
  • कोई खाली जुमला नहीं है, न ही खोखला वादा है।
  • इसमें सिद्धांत और उद्देश्य हैं,
  • ये है सच्ची और वास्तविक बिन किसी भेस के।
  • उसकी दया बिन रुके मानव जाति को प्रदान की जाती है।

2019/05/08

विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए

विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए

वो क्या है जो मनुष्य ने प्राप्त किया है जब उसने सर्वप्रथम परमेश्वर में विश्वास किया? तुमने परमेश्वर के बारे में क्या जाना है? परमेश्वर में अपने विश्वास के कारण तुम कितने बदले हो? अब तुम सभी जानते हो कि परमेश्वर में मनुष्य का विश्वास आत्मा की मुक्ति और देह के कल्याण के लिए ही नही है, और न ही यह उसके जीवन को परमेश्वर के प्रेम से सम्पन्न बनाने के लिए, इत्यादि है। जैसा यह है, यदि तुम परमेश्वर को सिर्फ़ देह के कल्याण के लिए या क्षणिक आनंद के लिए प्रेम करते हो, तो भले ही, अंत में, परमेश्वर के लिए

2019/05/01

Hindi Gospel Video "वार्तालाप" क्लिप 4 - सत्ताधारी हुकूमत की आज्ञा का पालन करना परमेश्वर की आज्ञा का पालन करने जैसा नहीं है


Hindi Gospel Video "वार्तालाप" क्लिप 4 - सत्ताधारी हुकूमत की

 आज्ञा का पालन करना परमेश्वर की आज्ञा का पालन करने जैसा नहीं है

      सीसीपी ने थ्री-सेल्फ़ कलीसिया के एक पादरी को बुलाया ताकि एक ईसाई को कपट से बहला-फुसलाकर परमेश्वर का त्याग कर देने के लिये उसका मत-परिवर्तन कर सके। उस ईसाई और पादरी के बीच पौलुस के वचनों को लेकर एक ख़ूबसूरत बहस हुई: "हर एक व्यक्‍ति शासकीय अधिकारियों के अधीन रहे, क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं जो परमेश्‍वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्‍वर के ठहराए हुए हैं" (रोमियों 13:1)।(© BSI) इन वचनों की उन दोनों की अलग-अलग व्याख्या क्या है? थ्री-सेल्फ़ कलीसिया का पादरी सीसीपी के अधीन है और उसने थ्री-सेल्फ़ कलीसिया का मार्ग अपनाया है—इसमें कौन-सा गुप्त अभिप्राय है? ईसाई "शासकीय अधिकारियों के अधीन रहे," को लेकर पादरी के वितर्क का खंडन कैसे करेगी?
      और पढ़ेंसर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया - सुसमाचार मूवी क्लिप

2019/04/30

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "सुसमाचार को फैलाने का कार्य मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है"



सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "सुसमाचार को फैलाने का कार्य

मनुष्यों को बचाने का कार्य भी है"

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "इस अंतिम युग में, मैं अपने नाम को अन्यजातियों के बीच गौरवान्वित करवाऊँगा, और अपने कर्मों को अन्यजाति देशों के सामने दिखवाऊँगा जिससे वे मुझे मेरे कर्मों के कारण सर्वशक्तिमान कह सकते हैं, और इसे इतना बना सकते हैं कि मेरे वचन शीघ्र ही घटित हो जाएँ। मैं सभी लोगों को ज्ञात करवाऊँगा कि मैं केवल इस्राएलियों का ही परमेश्वर नहीं हूँ, बल्कि अन्यजातियों का भी हूँ, यहाँ तक कि उनका भी हूँ जिन्हें मैंने शाप दिया है। मैं सभी लोगों को यह देखने दूँगा कि मैं समस्त सृष्टि का परमेश्वर हूँ। यह मेरा सबसे बड़ा कार्य है, अंत के दिनों के लिए मेरी कार्य योजना का उद्देश्य है, और अंत के दिनों में पूरा किया जाने वाला एकमात्र कार्य है।"

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तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा क्या तुम यीशु को द...