- कलीसिया का भजन
- राज्य के नज़ारे लगते हैं नये सदा
- I
- धुंधले आसमान से चमकता है उगता सूरज पूरब में,
- लौट आया है साकार रूप लेकर
- इस जगत में मुक्तिदाता।
- राज्य-जीवन को अंगीकार कर रही है दुनिया,
- जीवंत हो उठी है हर चीज़।
- आह! अब हो गया है सवेरा।
- आह! हमारी नज़रों के सामने है रोशनी।
- साकार हुई हैं उम्मीदें दो हज़ार सालों की।
