- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- सबसे बड़ी आशीष जो ईश्वर मानव को प्रदान करता है
- I
- परमेश्वर के शब्दों के समापन के साथ, उसका साम्राज्य है बन रहा।
- फिर से मानव के होने से सामान्य, प्रभु का साम्राज्य बना।
- साम्राज्य में रहते परमेश्वर के जन, फिर पाओगे तुम मनुष्योचित जीवन।
- आज, तुम जीते हो प्रभु के समक्ष; उसके साम्राज्य में जिओगे तुम कल।
- आनंद – सौहार्द से भरी धरती सारी।
- धरती पर प्रभु का साम्राज्य बना। धरती पर प्रभु का साम्राज्य बना।
- II
- बर्फीले ठण्ड के स्थान पर है ऐसी एक दुनिया, जहां है बहारें साल भर,
- जब इंसां ना झेलेगा इस दुनिया के दर्द-ओ-ग़म को।
- ना होंगें झगड़े इंसानों में, ना तो जंग होंगे मुल्कों में,
- ना होगी हिंसा, ना ही खून।
- उसके साम्राज्य में जिओगे तुम कल।
- आनंद – सौहार्द से भरी धरती सारी।
- धरती पर प्रभु का साम्राज्य बना। धरती पर प्रभु का साम्राज्य बना।
- III
- प्रभु विचरता है इस जग में, रस लेता अपने सिंहासन से।
- रहता है वो सितारों में, फरिश्ते उसके लिए नाचें-गाएं।
- फरिश्ते अब रोते नहीं, अपनी कमजोरियों पर।
- फरिश्ते उसके लिए नाचें-गाएं। फरिश्ते उसके लिए नाचें-गाएं।
- अब ना प्रभु कभी, सुनेगा रोना फरिश्तों का।
- फरिश्ते उसके लिए नाचें-गाएं। फरिश्ते उसके लिए नाचें-गाएं।
- IV
- तकलीफों की फरियाद करेगा ना कोई।
- आज, तुम जीते हो प्रभु के समक्ष; उसके साम्राज्य में जिओगे तुम कल।
- क्या नहीं, आशीष ये सबसे बड़ी है प्रभु ने दी जो इंसानों को?
- साम्राज्य में रहते परमेश्वर के जन, फिर पाओगे तुम मनुष्योचित जीवन।
- आज, तुम जीते हो प्रभु के समक्ष; उसके साम्राज्य में जिओगे तुम कल।
- आनंद – सौहार्द से भरी धरती सारी।
- धरती पर प्रभु का साम्राज्य बना। धरती पर प्रभु का साम्राज्य बना।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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