菜单

घर
परमेश्वर को जानना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
परमेश्वर को जानना लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

2019/06/23

परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है

परमेश्वर के वचनपरमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है

पिछले दो युगों के कार्यों में से एक चरण का कार्य इस्राएल में सम्पन्न हुआ; दूसरा यहूदिया में हुआ। सामान्य तौर पर कहा जाए तो, इस कार्य के किसी भी चरण ने इस्राएल को नहीं छोड़ा; कार्य के ये वे चरण थे जो आरंभ में चुने गए लोगों के बीच किए गए थे। इस प्रकार, इस्राएलियों के दृष्टिकोण से, यहोवा परमेश्वर केवल इस्राएलियों का परमेश्वर है। यहूदिया में यीशु के कार्य के कारण और सूली पर चढ़ाए जाने के उसके कार्य की पूर्णता के कारण, यहूदियों के दृष्टिकोण से, यीशु यहूदियों का मुक्तिदाता है। वह केवल यहूदियों का

2019/06/21

जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं


परमेश्वर के वचन-जो परमेश्वर को और उसके कार्य को जानते हैं केवल वे ही परमेश्वर को सन्तुष्ट कर सकते हैं

देहधारी परमेश्वर के कार्य में दो भाग शामिल हैं। जब सबसे पहली बार उसने देह धारण किया, तो लोगों ने उस पर विश्वास नहीं किया या उसे नहीं पहचाना, और यीशु को सलीब पर चढ़ा दिया। दूसरी बार भी लोगों ने उस पर विश्वास नहीं किया, उसे बहुत कम पहचाना, और एक बार फिर से मसीह को सलीब पर चढ़ा दिया। क्या मनुष्य परमेश्वर का बैरी नहीं हैं? यदि मनुष्य उसे नहीं जानता है, तो वह परमेश्वर का अंतरंग कैसे हो सकता है? और वह कैसे परमेश्वर की गवाही देने के योग्य हो सकता है? परमेश्वर को प्यार करना, परमेश्वर की सेवा करना, महिमा बढ़ाना—क्या ये कपटपूर्ण झूठ नहीं हैं? यदि तुम अपने जीवन को इन

2019/06/17

वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है?

वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकटनों को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है?

परमेश्वर का कार्य निरंतर आगे बढ़ता रहता है, और यद्यपि उसके कार्य का प्रयोजन नहीं बदलता है, जिस मायनों वह कार्य करता है वे निरंतर बदलते रहते हैं, और फलस्वरूप वे लोग भी बदलते रहते हैं जो उसका अनुसरण करते हैं। जितना अधिक परमेश्वर का कार्य होगा, उतना ही अधिक मनुष्य परमेश्वर को जानेगा, और मनुष्य का स्वभाव भी परमेश्वर के कार्य के साथ बदलेगा। हालाँकि, ऐसा इसलिए है कि परमेश्वर का कार्य हमेशा बदलता रहता है कि जो लोग पवित्र आत्मा के कार्य के बारे में नहीं जानते हैं और सत्य को न जानने वाले

2019/06/16

केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर-केवल पूर्ण बनाया गया ही एक सार्थक जीवन जी सकता है

वास्तव में, जो कार्य अब किया जा रहा है वह लोगों से शैतान का त्याग करवाने, उनके पुराने पूर्वजों का त्याग करवाने के लिए किया जा रहा है। वचन के द्वारा सभी न्यायों का उद्देश्य मानवता के भ्रष्ट स्वभाव को उजागर करना है और लोगों को जीवन का सार समझने में समर्थ बनाना है। ये बार-बार के न्याय मनुष्य के हदयों को छेद देते हैं। प्रत्येक न्याय सीधे उनके भाग्य पर प्रभाव डालता है और उनके हृदयों को घायल करने के आशय से है ताकि वे उन सभी बातों को जाने दें और फलस्वरूप जीवन के बारे में जान जाएँ, इस गंदी दुनिया को

2019/06/08

उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है

परमेश्वर के वचन-उद्धारकर्त्ता पहले ही एक "सफेद बादल" पर सवार होकर वापस आ चुका है

कई हज़ार सालों से, मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता के आगमन को देखने में सक्षम होने की लालसा की है। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता यीशु को देखने की इच्छा की है जब वह एक सफेद बादल पर सवार होकर स्वयं उन लोगों के बीच उतरता है जिन्होंने हज़ारों सालों से उसकी अभिलाषा की है और उसके लिए लालायित रहे हैं। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता की वापसी और लोगों के साथ उसके फिर से जुड़ने की लालसा की है, अर्थात्, उद्धारकर्त्ता यीशु के उन लोगों

2019/06/06

तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो?

तुम विश्वास के विषय में क्या जानते हो?

मनुष्य केवल विश्वास के अनिश्चित शब्द पर बना रहता है, फिर भी मनुष्य यह नहीं जानता है कि वह क्या है जो विश्वास का निर्माण करता है, और यह तो बिलकुल ही नहीं जानता है कि उसके पास विश्वास क्यों है। मनुष्य बहुत ही कम जानता है और स्वयं मनुष्य में बहुत सारी कमियाँ हैं; वह बस लापरवाही और अज्ञानता से मुझ पर विश्वास रखता है। यद्यपि वह नहीं जानता है कि विश्वास क्या है न ही वह यह जानता है कि वह क्यों मुझ पर विश्वास रखे हुए है, वह सनक के साथ निरन्तर ऐसा करता रहता है। जो मैं मनुष्य से चाहता

2019/06/05

एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है

एक वास्तविक मनुष्य होने का क्या अर्थ है

मनुष्य का प्रबंधन करना मेरा कार्य है, और मेरे द्वारा उसे जीत लिया जाना और भी अधिक कुछ चीज़ है जो तब नियत की गई थी जब मैंने संसार की रचना की थी। हो सकता है कि लोग नहीं जानते हों कि अंत के दिनों में मैं उन्हें पूरी तरह से जीत लूँगा और हो सकता है कि वे इस बारे में भी अनजान हों कि मानवजाति में से विद्रोही लोगों को जीत लेना ही शैतान को मेरे द्वारा हराने का प्रमाण है। परन्तु जब मेरा शत्रु मेरे साथ संघर्ष में शामिल हुआ, तो मैंने उसे पहले से ही बता दिया था कि मैं उन सभी को जिन्हें शैतान ने बंदी बना लिया था

2019/06/04

पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान

पतरस के अनुभव: ताड़ना और न्याय का उसका ज्ञान

जब पतरस को परमेश्वर के द्वारा ताड़ना दी जा रही थी, तो उसने प्रार्थना की, "हे परमेश्वर! मेरी देह अनाज्ञाकारी है, तू मुझे ताड़ना देता है और मेरा न्याय करता है। मैं तेरी ताड़ना और न्याय में आनन्दित होता हूँ, भले ही तू मुझे न चाहे, फिर भी मैं तेरे न्याय में तेरे पवित्र और धर्मी स्वभाव को देखता हूँ। जब तू मेरा न्याय करता है, ताकि अन्य लोग तेरे न्याय में तेरे धर्मी स्वभाव को देख सकें, तो मैं संतुष्टि का एहसास करता हूँ। मैं यही चाहता हूँ कि तेरा धर्मी स्वभाव प्रकट किया जाये ताकि सभी प्राणी तेरे धर्मी स्वभाव को देख सकें, और मैं

2019/05/29

जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं

जो लोग परमेश्वर को नहीं जानते हैं वे ही परमेश्वर का विरोध करते हैं

परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य, मनुष्यों में कैसा प्रभाव प्राप्त किया जाना है, और मनुष्य के प्रति परमेश्वर की इच्छा क्या है, को समझना यही सब बातें हर उस व्यक्ति को उपार्जित करनी चाहिए जो परमेश्वर का अनुसरण करता है। अभी सभी मनुष्यों में जिस चीज का अभाव है, वह है परमेश्वर के कार्य का ज्ञान। मनुष्य न बूझता है और न ही समझता है कि वास्तव में कौन सी चीज मनुष्य में परमेश्वर के कर्म, परमेश्वर के समस्त कार्य को, और सृष्टि की रचना के बाद से परमेश्वर की इच्छा को निर्मित करती है। यह अपर्याप्तता न केवल समस्त धार्मिक जगत में देखी जाती है, बल्कि इसके अलावा परमेश्वर के सभी विश्वासियों में

2019/05/28

एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है

परमेश्वर के वचन-एक अपरिवर्तित स्वभाव का होना परमेश्वर के साथ शत्रुता में होना है

भ्रष्टाचार के हजारों सालों बाद, मनुष्य बेसुध और मूर्ख बन गया है, एक दुष्ट आत्मा जो परमेश्वर का विरोध करती है, इस हद तक कि परमेश्वर के प्रति मनुष्य की विद्रोहशीलता इतिहास की पुस्तकों में दर्ज हो गई है, और यहाँ तक कि मनुष्य खुद भी अपने विद्रोही स्वभाव का पूरा लेखा देने के अयोग्य है—क्योंकि मनुष्य शैतान के द्वारा पूरी तरह से भ्रष्ट किया जा चुका है, और शैतान के द्वारा रास्ते से भटका दिया गया है और वह नहीं जानता कि कहाँ मुड़ना है। आज भी, मनुष्य परमेश्वर को धोखा देता है: जब मनुष्य परमेश्वर को देखता है, तो

2019/05/22

केवल वे लोग ही परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं जो परमेश्वर को जानते हैं

केवल वे लोग ही परमेश्वर की गवाही दे सकते हैं जो परमेश्वर को जानते हैं

यह स्वर्ग का नियम और पृथ्वी का सिद्धांत है कि परमेश्वर पर विश्वास किया जाए और उसको जाना जाए, और आज - इस युग के दौरान जब देहधारी परमेश्वर स्वयं अपना कार्य करता है - यह परमेश्वर को जानने के लिए विशेष अच्छा समय है। परमेश्वर को संतुष्ट करना उसकी इच्छा को समझने पर आधारित है, और परमेश्वर की इच्छा को जानने के लिए, परमेश्वर को अच्छी तरह से जानना आवश्यक है। परमेश्वर की यह जानकारी एक दर्शन है जो एक विश्वासी के पास होना चाहिए; यह परमेश्वर में मनुष्य के विश्वास का आधार है।

2019/05/20

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है

केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है

आज, जब तुम लोग परमेश्वर को जानने और प्रेम करने की कोशिश करते हो, तो एक ओर तुम लोगों को अवश्य कठिनाई और शुद्धिकरण को झेलना चाहिए और दूसरी ओर, तुम लोगों को एक क़ीमत अवश्य चुकानी चाहिए। परमेश्वर को प्रेम करने के सबक से ज्यादा गहरा कोई सबक नहीं है, और ऐसा कहा जा सकता है कि जीवन भर के विश्वास से लोग जिस सबक को सीखते हैं वह है कि परमेश्वर को किस प्रकार से प्रेम करें। कहने का अर्थ है

2019/05/19

परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है

परमेश्वर के वचन के द्वारा सब कुछ प्राप्त हो जाता है

परमेश्वर भिन्न-भिन्न युगों के अनुसार अपने वचन कहता है और अपना कार्य करता है, तथा भिन्न-भिन्न युगों में, वह भिन्न-भिन्न वचन कहता है। परमेश्वर नियमों से नहीं बँधता है, और एक ही कार्य को दोहराता नहीं है, और न अतीत की बातों को लेकर विषाद करता है; वह ऐसा परमेश्वर है जो सदैव नया है, कभी पुराना नहीं होता है, और वह हर दिन नये वचन बोलता है। जिस चीज का आज पालन किया जाना चाहिए उसका तुम्हें पालन करना चाहिए; यही मनुष्य की जिम्मेवारी और कर्तव्य है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि अभ्यास परमेश्वर

2019/05/18

परमेश्वर के वचनों का एक भजन सृष्टिकर्ता के अधिकार का असली मूर्त रूप



  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • सृष्टिकर्ता के अधिकार का असली मूर्त रूप 

  • I
  • दुनिया और इंसान की नियति,
  • रचयिता के प्रभुत्व से जुड़ी है गहराई से,
  • अलग हो नहीं सकती रचयिता के आयोजन से,
  • अटूट बंधन है इसका रचयिता के अधिकार से।
  • तमाम चीज़ों के कानूनों से समझता है इंसा,
  • रचयिता के आयोजन और सत्ता को;
  • जीवित रहने के नियमों से महसूस करता है इंसा,
  • परमेश्वर के शासन को;

2019/05/17

परमेश्वर के वचनों का एक भजन एकमात्र परमेश्वर का प्रभुत्व है इंसान की नियति पर



  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • एकमात्र परमेश्वर का प्रभुत्व है इंसान की नियति पर

  •  
  • I
  • तुम अपने जीवन में चाहे कितनी ही दूर तक चले हो,
  • चाहे तुम कितने ही बुज़ुर्ग हो,
  • तुम्हारी यात्रा चाहे कितनी ही शेष हो,
  • तुम्हें परमेश्वर के अधिकार को पहचानना होगा,
  • वो तुम्हारा अद्वितीय स्वामी है, इसे पूरे ईमान से स्वीकारना होगा।
  • कितनी ही बड़ी हो काबिलियत किसी की,
  • दूसरों की नियति को कोई प्रभावित कर नहीं सकता,
  • आयोजित करने, बदलने या काबू करने की तो बात ही क्या।
  • इंसान की हर चीज़ पर प्रभुत्व है सिर्फ़ अद्वितीय परमेश्वर का,
  • क्योंकि इंसान की नियति पर सिर्फ़ उसी को अधिकार है शासन करने का।
  • इस तरह सिर्फ़ सृष्टिकर्ता ही स्वामी है इंसान का।

2019/05/12

सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए

सेवा के धार्मिक तरीके पर अवश्य प्रतिबंध लगना चाहिए

संपूर्ण जगत में अपने कार्य की शुरूआत से ही, परमेश्वर ने अनेक लोगों को अपनी सेवा के लिए पूर्वनियत किया है, जिसमें हर व्यवसाय के लोग शामिल हैं। उसका प्रयोजन अपनी स्वयं की इच्छा को पूरा करना है और यह सुनिश्चित करना है कि पृथ्वी पर उसके कार्य को निर्बाध रूप से सफलता तक पहुँचाया जाए। परमेश्वर का लोगों को अपनी सेवा हेतु चुनने का यही प्रयोजन है। परमेश्वर की सेवा करने वाले हर व्यक्ति को परमेश्वर की इस इच्छा को

2019/05/01

Hindi Gospel Video "वार्तालाप" क्लिप 4 - सत्ताधारी हुकूमत की आज्ञा का पालन करना परमेश्वर की आज्ञा का पालन करने जैसा नहीं है


Hindi Gospel Video "वार्तालाप" क्लिप 4 - सत्ताधारी हुकूमत की

 आज्ञा का पालन करना परमेश्वर की आज्ञा का पालन करने जैसा नहीं है

      सीसीपी ने थ्री-सेल्फ़ कलीसिया के एक पादरी को बुलाया ताकि एक ईसाई को कपट से बहला-फुसलाकर परमेश्वर का त्याग कर देने के लिये उसका मत-परिवर्तन कर सके। उस ईसाई और पादरी के बीच पौलुस के वचनों को लेकर एक ख़ूबसूरत बहस हुई: "हर एक व्यक्‍ति शासकीय अधिकारियों के अधीन रहे, क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं जो परमेश्‍वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्‍वर के ठहराए हुए हैं" (रोमियों 13:1)।(© BSI) इन वचनों की उन दोनों की अलग-अलग व्याख्या क्या है? थ्री-सेल्फ़ कलीसिया का पादरी सीसीपी के अधीन है और उसने थ्री-सेल्फ़ कलीसिया का मार्ग अपनाया है—इसमें कौन-सा गुप्त अभिप्राय है? ईसाई "शासकीय अधिकारियों के अधीन रहे," को लेकर पादरी के वितर्क का खंडन कैसे करेगी?
      और पढ़ेंसर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया - सुसमाचार मूवी क्लिप

2019/04/28

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" (भाग 2)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" (भाग 2)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा की यह अवधारणा सबसे बेतुकी है! यह परमेश्वर को खंडित करता और उसे तीन व्यक्तियों में विभाजित करता है, प्रत्येक एक ओहदे और आत्मा के साथ है; तो कैसे वह अब भी एक आत्मा और एक परमेश्वर हो सकता है? मुझे बताओ, आकाश और पृथ्वी, और उसके भीतर की सारी चीज़ें क्या पिता, पुत्र या पवित्र आत्मा के द्वारा बनाई गई थीं? कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने यह सब एक साथ बनाया।

2019/04/27

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" (भाग 1)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कथन "क्या त्रित्व का अस्तित्व है?" (भाग 1)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा की यह अवधारणा सबसे बेतुकी है! यह परमेश्वर को खंडित करता और उसे तीन व्यक्तियों में विभाजित करता है, प्रत्येक एक ओहदे और आत्मा के साथ है; तो कैसे वह अब भी एक आत्मा और एक परमेश्वर हो सकता है? मुझे बताओ, आकाश और पृथ्वी, और उसके भीतर की सारी चीज़ें क्या पिता, पुत्र या पवित्र आत्मा के द्वारा बनाई गई थीं? कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने यह सब एक साथ बनाया। फिर किसने मानवजाति को छुड़ाया? क्या यह पवित्र आत्मा था, पुत्र था या पिता? कुछ लोग कहते हैं कि वह पुत्र था जिसने

2019/04/25

परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है

परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है

मानवजाति का सदस्य और सच्चे ईसाई होने के नाते, अपने मन और शरीर को परमेश्वर के आदेश को पूरा करने के लिए समर्पित करना हम सभी की ज़िम्मेदारी और दायित्व है, क्योंकि हमारा सम्पूर्ण अस्तित्व परमेश्वर से आया है, और यह परमेश्वर की संप्रभुता के कारण अस्तित्व में है। यदि हमारे मन और शरीर परमेश्वर के आदेश के लिए नहीं हैं और मानवजाति के धर्मी कार्य के लिए नहीं हैं, तो हमारी आत्माएँ उन लोगों के योग्य नहीं हैं जो परमेश्वर के आदेश के लिए शहीद हुए हैं, परमेश्वर के लिए तो और भी अधिक अयोग्य हैं, जिसने हमें सब कुछ प्रदान किया है।

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा

तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा क्या तुम यीशु को द...