- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- एकमात्र परमेश्वर का प्रभुत्व है इंसान की नियति पर
- I
- तुम अपने जीवन में चाहे कितनी ही दूर तक चले हो,
- चाहे तुम कितने ही बुज़ुर्ग हो,
- तुम्हारी यात्रा चाहे कितनी ही शेष हो,
- तुम्हें परमेश्वर के अधिकार को पहचानना होगा,
- वो तुम्हारा अद्वितीय स्वामी है, इसे पूरे ईमान से स्वीकारना होगा।
- कितनी ही बड़ी हो काबिलियत किसी की,
- दूसरों की नियति को कोई प्रभावित कर नहीं सकता,
- आयोजित करने, बदलने या काबू करने की तो बात ही क्या।
- इंसान की हर चीज़ पर प्रभुत्व है सिर्फ़ अद्वितीय परमेश्वर का,
- क्योंकि इंसान की नियति पर सिर्फ़ उसी को अधिकार है शासन करने का।
- इस तरह सिर्फ़ सृष्टिकर्ता ही स्वामी है इंसान का।
- II
- ज्ञान होना चाहिये सभी को, इंसान की नियति पर
- परमेश्वर के प्रभुत्व का।
- कुंजी है ये इंसानी ज़िंदगी को जानने की, सत्य को पाने की,
- सबक है ये हर रोज़ परमेश्वर को जानने का।
- छोटा मार्ग ले नहीं सकते तुम इस लक्ष्य को पाने का।
- कितनी ही बड़ी हो काबिलियत किसी की,
- दूसरों की नियति को कोई प्रभावित कर नहीं सकता,
- आयोजित करने, बदलने या काबू करने की तो बात ही क्या।
- इंसान की हर चीज़ पर प्रभुत्व है सिर्फ़ अद्वितीय परमेश्वर का,
- क्योंकि इंसान की नियति पर सिर्फ़ उसी को अधिकार है शासन करने का।
- इस तरह सिर्फ़ सृष्टिकर्ता ही स्वामी है इंसान का।
- III
- बच नहीं सकते परमेश्वर के प्रभुत्व से तुम।
- परमेश्वर एकमात्र प्रभु है इंसान का।
- एकमात्र स्वामी है वो इंसान की नियति का।
- इसलिये ख़ुद अपनी नियति पर इंसान हुक्म चला नहीं सकता;
- ये नामुमकिन है, इंसान इसके परे जा नहीं सकता।
- कितनी ही बड़ी हो काबिलियत किसी की,
- दूसरों की नियति को कोई प्रभावित कर नहीं सकता,
- आयोजित करने, बदलने या काबू करने की तो बात ही क्या।
- इंसान की हर चीज़ पर प्रभुत्व है सिर्फ़ अद्वितीय परमेश्वर का,
- क्योंकि इंसान की नियति पर सिर्फ़ उसी को अधिकार है शासन करने का।
- इस तरह सिर्फ़ सृष्टिकर्ता ही स्वामी है इंसान का।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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