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2019/05/18

परमेश्वर के वचनों का एक भजन सृष्टिकर्ता के अधिकार का असली मूर्त रूप



  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • सृष्टिकर्ता के अधिकार का असली मूर्त रूप 

  • I
  • दुनिया और इंसान की नियति,
  • रचयिता के प्रभुत्व से जुड़ी है गहराई से,
  • अलग हो नहीं सकती रचयिता के आयोजन से,
  • अटूट बंधन है इसका रचयिता के अधिकार से।
  • तमाम चीज़ों के कानूनों से समझता है इंसा,
  • रचयिता के आयोजन और सत्ता को;
  • जीवित रहने के नियमों से महसूस करता है इंसा,
  • परमेश्वर के शासन को;
  • II
  • चीज़ों की नियति से वो नतीजे निकालता है,
  • रचयिता जिस तरह अपनी सत्ता का उपयोग करता है,
  • उन्हें काबू में रखता है;
  • इंसानों और चीज़ों की ज़िंदगी के चक्र में,
  • चीज़ों और जीवों के लिये इंसा,
  • रचयिता के आयोजन और प्रबंधन की अनुभूति करता है,
  • और गवाही देता है, किस तरह वो आयोजन,
  • और प्रबंधन, ऊँचे उठ जाते हैं दुनियावी कानूनों से,
  • नियमों, व्यवस्थाओं से, और ताकतों और शक्तियों से।
  • इंसा इसकी रोशनी में, मानने को विवश है,
  • कोई सृजित प्राणी, परमेश्वर की सत्ता को भंग नहीं कर सकता,
  • कोई ताकत दख़ल दे नहीं सकती, न बदल सकती, किसी घटना,
  • किसी भी चीज़ को, जो कर दिया निश्चित रचयिता ने।
  • इन्हीं दिव्य नियमों और कानूनों के तहत,
  • पीढ़ी-दर-पीढ़ी, इंसान और हर चीज़ रहती है और बढ़ती है।
  • क्या ये सृष्टिकर्ता के अधिकार का, असली मूर्त रूप नहीं है?
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • अनुशंसित:परमेश्वर के भजन - चुने हुए भजनों को सूची - परमेश्वर प्रेम को ब्यक्त करना

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