अंतिम दिनों के मसीह के कथन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" (भाग छे:)
सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "जो परमेश्वर की निंदा करते हैं या उसे कोसते हैं उन लोगों के प्रति उसका उपचार, या वे जो उस पर कलंक लगाते हैं—लोग जो जानबूझकर उस पर हमला करते हैं, कलंक लगाते हैं, और उसे कोसते हैं—वह उनकी आँखों को अँधा या कान को बहरा नहीं करता है। उनके प्रति उसके पास एक साफ मनोवृत्ति है। वह इन लोगों से घृणा करता है, अपने हृदय में उनकी भ्रत्सना करता है।
वह खुलकर उनके लिए परिणामों की घोषणा भी करता है, ताकि लोग जान सकें कि जो उसकी निंदा करते हैं उनके प्रति उसके पास एक स्पष्ट मनोवृत्ति है, और ताकि वे यह भी जान सकें कि वह किस प्रकार उनके नतीजों को निर्धारित करता है। फिर भी, परमेश्वर के ऐसा कहने के बाद, बहुत मुश्किल से ही लोग उस सच्चाई को देख पाते हैं कि परमेश्वर किस प्रकार ऐसे लोगों से निपटता है, और वे परमेश्वर के नतीजों के पीछे के सिद्धांतों, और उनके लिए उसकी आज्ञा को समझ नहीं सकते हैं। ऐसा कहना चाहिए, मानवजाति उस विशेष मनोवृत्ति और पद्धति को देख नहीं सकते हैं जो उनसे निपटने के लिए परमेश्वर के पास है। कुछ चीज़ो को करने के लिए इसे परमेश्वर के सिद्धांतों से ताल्लुक रखना है। कुछ लोगों के बुरे व्यवहार से निपटने के लिए परमेश्वर कुछ प्रमाणित तथ्यों की खोज का प्रयोग करता है। अर्थात्, वह उनके पापों की घोषणा नहीं करता है और उनके परिणामों को निर्धारित नहीं करता है, परन्तु वह प्रत्यक्ष रूप से प्रमाणित तथ्यों की खोज का प्रयोग करता है जिससे उन्हें दण्डित करने, और उनका उचित बदला देने की अनुमति दे सके। जब ये प्रमाणित तथ्य घटित होते हैं, इससे लोगों को शरीर में कष्ट उठाना पड़ता है; यह सब कुछ ऐसा है जिसे मनुष्य की आँखों से देखा जा सकता है। कुछ लोगों के बुरे व्यवहार से निपटते समय, परमेश्वर बस वचनों से षाप देता है, परन्तु उसी समय, परमेश्वर का क्रोध उनके ऊपर आ जाता है, और वह दण्ड जिसे वे प्राप्त करते हैं वह शायद कुछ ऐसा होता है जिसे लोग देख नहीं सकते हैं, परन्तु इस प्रकार के नतीजे शायद उन नतीज़ों से कहीं ज़्यादा गंभीर हो सकते हैं जब लोग देख सकते हैं कि उन्हें दण्डित किया या मारा जा रहा है।"
वह खुलकर उनके लिए परिणामों की घोषणा भी करता है, ताकि लोग जान सकें कि जो उसकी निंदा करते हैं उनके प्रति उसके पास एक स्पष्ट मनोवृत्ति है, और ताकि वे यह भी जान सकें कि वह किस प्रकार उनके नतीजों को निर्धारित करता है। फिर भी, परमेश्वर के ऐसा कहने के बाद, बहुत मुश्किल से ही लोग उस सच्चाई को देख पाते हैं कि परमेश्वर किस प्रकार ऐसे लोगों से निपटता है, और वे परमेश्वर के नतीजों के पीछे के सिद्धांतों, और उनके लिए उसकी आज्ञा को समझ नहीं सकते हैं। ऐसा कहना चाहिए, मानवजाति उस विशेष मनोवृत्ति और पद्धति को देख नहीं सकते हैं जो उनसे निपटने के लिए परमेश्वर के पास है। कुछ चीज़ो को करने के लिए इसे परमेश्वर के सिद्धांतों से ताल्लुक रखना है। कुछ लोगों के बुरे व्यवहार से निपटने के लिए परमेश्वर कुछ प्रमाणित तथ्यों की खोज का प्रयोग करता है। अर्थात्, वह उनके पापों की घोषणा नहीं करता है और उनके परिणामों को निर्धारित नहीं करता है, परन्तु वह प्रत्यक्ष रूप से प्रमाणित तथ्यों की खोज का प्रयोग करता है जिससे उन्हें दण्डित करने, और उनका उचित बदला देने की अनुमति दे सके। जब ये प्रमाणित तथ्य घटित होते हैं, इससे लोगों को शरीर में कष्ट उठाना पड़ता है; यह सब कुछ ऐसा है जिसे मनुष्य की आँखों से देखा जा सकता है। कुछ लोगों के बुरे व्यवहार से निपटते समय, परमेश्वर बस वचनों से षाप देता है, परन्तु उसी समय, परमेश्वर का क्रोध उनके ऊपर आ जाता है, और वह दण्ड जिसे वे प्राप्त करते हैं वह शायद कुछ ऐसा होता है जिसे लोग देख नहीं सकते हैं, परन्तु इस प्रकार के नतीजे शायद उन नतीज़ों से कहीं ज़्यादा गंभीर हो सकते हैं जब लोग देख सकते हैं कि उन्हें दण्डित किया या मारा जा रहा है।"
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