बाहर से, ऐसा लगता है कि वर्तमान चरण में परमेश्वर के कार्य की कृतियां पहले ही समाप्त हो चुकी हैं, और मानव जाति पहले ही उसके वचनों का न्याय, ताड़ना, दंड, और शुद्धिकरण अनुभव कर चुकी है, और वे सेवा करने वालों की परीक्षा, ताड़ना के समय का शुद्धिकरण, मृत्यु की परीक्षा, विफलताओं की परीक्षा, और परमेश्वर के प्रेम के समय[क] जैसे चरणों से गुज़र चुके हैं। यद्यपि लोग प्रत्येक चरण में बहुत कष्टों से गुज़रे हैं, वे फिर भी परमेश्वर की इच्छा को समझ नहीं पाए हैं।
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2017/12/04
2017/11/27
जिनके स्वभाव परिवर्तित हो चुके हैं, वो वे लोग हैं जो परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता में प्रवेश कर चुके हैं
पवित्र आत्मा मनुष्य के हृदय को पहले सभी व्यक्तियों, कार्यक्रमों और चीजों से अलग करता है, ताकि वह विश्वास करे कि परमेश्वर का वचन पूर्ण रूप से और बिना संदेह के, सत्य मानने योग्य है। क्योंकि तू परमेश्वर पर विश्वास करता है अतः उसके वचनों पर भी विश्वासकर; यदि तू बरसों से उस पर अपना भरोसा धरे हुए है, परंतु पवित्र आत्मा के तरीकों को नहीं समझ पाया है, तो क्या तू सही अर्थ में एक विश्वासी है? परमेश्वर के साथ एक साधारण एवं उचित जीवन प्राप्त करने हेतु पहले उसके वचनों पर विश्वास करना होगा।
2017/11/19
परमेश्वर में अपने विश्वास में तुम्हें परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना चाहिए
तुम परमेश्वर में विश्वास क्यों करते हो? अधिकांश लोग इस प्रश्न से हैरान हैं। उनके पास व्यावहारिक परमेश्वर और स्वर्ग के परमेश्वर के बारे में हमेशा से बिलकुल दो भिन्न दृष्टिकोण रहे हैं, जो दिखाता है कि वे आज्ञापालन के लिए नहीं, बल्कि कुछ निश्चित लाभों को प्राप्त करने, या विपत्तियों के कष्ट से बच निकलने के लिए परमेश्वर पर विश्वास करते हैं।
2017/11/08
विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए
वो क्या है जो मनुष्य ने प्राप्त किया है जब उसने सर्वप्रथम परमेश्वर में विश्वास किया? तुमने परमेश्वर के बारे में क्या जाना है? परमेश्वर में अपने विश्वास के कारण तुम कितने बदले हो? अब तुम सभी जानते हो कि परमेश्वर में मनुष्य का विश्वास आत्मा की मुक्ति और देह के कल्याण के लिए ही नही है, और न ही यह उसके जीवन को परमेश्वर के प्रेम से सम्पन्न बनाने के लिए, इत्यादि है।
2017/11/05
Hindi Christian Song "एक निर्मित प्राणी के दिल की आवाज़" | A Song of Praise From Christians' Hearts
Hindi Christian Song "एक निर्मित प्राणी के दिल की आवाज़" | A Song of Praise From Christians' Hearts
मैंने चाहा रोना, कोई जगह नहीं थी सही।
मैंने चाहा गाना, मिला नहीं कोई गीत।
मैंने चाहा एक निर्मित प्राणी के प्रेम का करना इज़हार।
2017/11/02
भ्रष्ट मनुष्य परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है
मनुष्य, शैतान के प्रभाव से मुक्ति के बिना बेड़ी में बँधा हुआ, अंधकार के प्रभाव के आवरण में रह रहा है। और मनुष्य का स्वभाव, शैतान के द्वारा परिवर्तित होकर, तेज़ी से भ्रष्ट होता जा रहा है। दूसरे शब्दों में, मनुष्य, परमेश्वर को वास्तव में प्यार करने में असमर्थ, निरंतर अपने भ्रष्ट शैतानी स्वभाव में रहता है।
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तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा
तुम यीशु के आध्यात्मिक शरीर को देख रहे होगे, ऐसा तब होगा जब परमेश्वर स्वर्ग और पृथ्वी को नये सिरे से बना चुका होगा क्या तुम यीशु को द...
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परमेश्वर के वचन - परमेश्वर सम्पूर्ण सृष्टि का प्रभु है पिछले दो युगों के कार्यों में से एक चरण का कार्य इस्राएल में सम्पन्न हुआ; दू...
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परमेश्वर के वचनों का एक भजन इंसान के लिए परमेश्वर के प्रबंध के मायने I प्रबंधन ईश्वर का ऐसे लोगों को प्राप्त करने के लिए...



