प्रकट कर दिया है अपना महिमामय देह,
हो चुका है प्रकट उसका पवित्र देह;
स्वयं परमेश्वर है वो: पूर्ण सच्चा परमेश्वर है वो।
जगत बदला है पूरा तो बदला है देह भी।
परमेश्वर का व्यक्तित्व है रूपांतरण उसका, स्वर्ण मुकुट सिर पर उसके।
सफ़ेद लबादा तन पर, स्वर्ण बंध वक्ष पर उसके।
हर चीज़ जगत की है चरण-पीठ उसकी, आँखें अग्नि-लौ की मानिंद उसकी,
दुधारी तलवार मुख में, दाएं हाथ में सप्त-तारे।
राज्य-पथ असीम और प्रकाशमान,
उदित होकर जगमगाती महिमा परमेश्वर की।
पर्वत जयजयकार करें, जल ख़ुशियाँ मनाएँ;
सूरज, चाँद-सितारे घूमें अपनी व्यवस्था में,
पूरी की जिसने प्रबंधन योजना छ: हज़ार वर्षों की, लौटा है जीतकर!
नाचें-कूदें आनंद मनाएं, जयजयकार करें परमेश्वर की सब।
सच्चा सर्वशक्तिमान परमेश्वर!
आसीन होता अपने सिंहासन पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर!
उसके पवित्र नाम का गुणगान करो!
सर्वशक्तिमान की विजय-पताका लहराती, भव्य रूप में सिय्योन पर्वत पर!
करता हर देश जयजयकार, गाता हर इक जन ऊँचे-साफ़ सुर में!
आनंदित है सिय्योन पर्वत, उभर रही है महिमा परमेश्वर की!
सोचा न था सपने में भी भेंट कभी होगी उससे,
रूबरू होता हूँ हर दिन, खोल देता हूँ दिल अपना आगे उसके।
स्रोत है मेरे खान-पान का परमेश्वर, हर चीज़ की आपूर्ति करता परमेश्वर।
जीवन, वचन, चिंतन, विचार और क्रियाएं,
चमके उसकी महिमा उन पर जब वो हर कदम पर राह दिखाए।
नाफ़रमानी करे कोई दिल अगर,
न्याय फ़ौरन आ जाए, न्याय फ़ौरन आ जाए।
खाऊँ-पिऊँ, रहूँ साथ परमेश्वर के;
आनंद मनाऊँ और साथ चलूँ परमेश्वर के।
पाऊँ महिमा और आशीष एक साथ, राज करूँ उसके राज्य में उसके साथ।
ओह, इतना आनंद! और इतनी मधुरता!
रूबरू उसके हर दिन, वो हमसे बतियाँ करता।
करते बातें उससे, प्रबुद्ध होते हर दिन, और देखते कुछ नया हर नये दिन।
खुले हमारे नयन आत्मिक, हुए उजागर रहस्य आध्यात्मिक!
मुक्त है जीना पवित्र जीवन। रोको न तुम अपने कदम।
बढ़ते जाओ आगे-आगे, आगे है एक अद्भुत जीवन।
मधुर ज़ायका पा लेना बस नाकाफ़ी है, परमेश्वर की ओर रहो गतिमान तुम।
सब चीज़ों का समावेश है, और प्रचुर हैं,
अगर कहीं कुछ कम है, तो वो है उसके हाथों में।
करो सक्रिय सहयोग, करो प्रवेश उसके अंतर में,
नहीं रहेगा फिर कुछ भी पहले जैसा।
ऊँचा होगा जीवन हमारा,
न कर पाएगा परेशान कोई इंसान, कोई बात, न चीज़ कोई।
"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से
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