अंतिम दिनों के मसीह के कथन "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" (भाग चार)
सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं "हम यहाँ पर आदर्श वचनों को पढ़ते हैं जिन्हें अय्यूब के द्वारा बोला गया था, ऐसे वचन जो इस बात का प्रमाण हैं कि उसने शैतान पर विजय पा लिया था। उसने कहा, "मैं अपनी माँ के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊँगा।" यह परमेश्वर के प्रति अय्यूब की आज्ञाकारिता की मनोवृत्ति
है। इसके आगे, फिर उसने कहा: "यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है।" अय्यूब के द्वारा कहे गए इन वचनों से प्रमाणित होता है कि परमेश्वर मनुष्य के हृदय की गहराई का अवलोकन करता है, यह कि वह मनुष्य के मस्तिष्क के भीतर देख सकता है, और वे साबित करते हैं कि अय्यूब के विषय में उसकी स्वीकृति त्रुटिहीन है, और यह कि यह मनुष्य धर्मी था जिसे परमेश्वर के द्वारा स्वीकार किया गया था। "यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है।" ये वचन परमेश्वर के प्रति अय्यूब की गवाही हैं।......इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुँह से कोई पाप नहीं किया। उसने न केवल अपने होंठों से पाप नहीं किया, बल्कि उसने अपने हृदय में परमेश्वर के बारे में कोई शिकायत नहीं की। उसने परमेश्वर के बारे में कष्टदायक शब्दों को नहीं कहा, न ही उसने परमेश्वर के विरूद्ध पाप किया। न केवल उसके मुँह ने परमेश्वर के नाम को धन्य कहा, बल्कि उसने अपने हृदय में भी परमेश्वर के नाम को धन्य कहा; उसका मुँह एवं हृदय एक ही था। यही वह सच्चा अय्यूब था जिसे परमेश्वर के द्वारा देखा गया था, और यही वह प्रमुख कारण था कि क्यों परमेश्वर ने अय्यूब को हृदय में संजोकर रखा था।"
है। इसके आगे, फिर उसने कहा: "यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है।" अय्यूब के द्वारा कहे गए इन वचनों से प्रमाणित होता है कि परमेश्वर मनुष्य के हृदय की गहराई का अवलोकन करता है, यह कि वह मनुष्य के मस्तिष्क के भीतर देख सकता है, और वे साबित करते हैं कि अय्यूब के विषय में उसकी स्वीकृति त्रुटिहीन है, और यह कि यह मनुष्य धर्मी था जिसे परमेश्वर के द्वारा स्वीकार किया गया था। "यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है।" ये वचन परमेश्वर के प्रति अय्यूब की गवाही हैं।......इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुँह से कोई पाप नहीं किया। उसने न केवल अपने होंठों से पाप नहीं किया, बल्कि उसने अपने हृदय में परमेश्वर के बारे में कोई शिकायत नहीं की। उसने परमेश्वर के बारे में कष्टदायक शब्दों को नहीं कहा, न ही उसने परमेश्वर के विरूद्ध पाप किया। न केवल उसके मुँह ने परमेश्वर के नाम को धन्य कहा, बल्कि उसने अपने हृदय में भी परमेश्वर के नाम को धन्य कहा; उसका मुँह एवं हृदय एक ही था। यही वह सच्चा अय्यूब था जिसे परमेश्वर के द्वारा देखा गया था, और यही वह प्रमुख कारण था कि क्यों परमेश्वर ने अय्यूब को हृदय में संजोकर रखा था।"
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